Tuesday, April 6, 2021

सुनो

एक बार कहीं पढ़ा था कि संसार में जो भी आवाज़ें होती हैं, वो कहीं जाती नहीं। सारी आवाज़ें हमारे आस-पास बिखरी रह जाती हैं। ध्वनि-ऊर्जा नष्ट नहीं होती। कई वैज्ञानिक ऐसे अविष्कार करने की कोशिश करते रहते हैं जिससे सारी पुरानी आवाज़ें वापस सुनी जा सकें। शायद उनमें से कोई एक, किसी दिन सफल हो।

तुमसे बहुत कुछ कहना था। तुम सुनने को रुकी नहीं। तुमसे बहुत कुछ सुनना था। तुमने कभी कहा नहीं। शायद मेरी आवाज़ कभी तुम तक पहुँचे। क्योंकि हमको जो कहना था, तुमसे ... वो कह दिया है आज। हाँ, अपनी जगह बैठे ही कहा है। हाँ, बिना रिकॉर्ड किये कहा है। हाँ, किसी के सुने बिना कहा है। शायद मेरी आवाज़ कभी तुम तक पहुँचे। उससे क्या होगा पता नहीं। उस दिन क्या होगा, पता नहीं। लेकिन जिस दिन तुम तक वो आवाज़ पहुँचे, शायद तुम्हारी आवाज़ हम तक वापस पहुँचे। तब तक के लिए ये सुनो -

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